राजस्थान के टोंक जिले में किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने टोंक शहर में हाल ही में हुई पथराव की घटना और बिजली निगम की कार्रवाई को लेकर शासन-प्रशासन पर सवाल उठाए हैं उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के मुताबिक, जाति, धर्म, निवास और लिंग के आधार पर भेदभाव करना वर्जित है इसलिए प्रशासन को बिना किसी पक्षपात के अपना कर्तव्य निभाना चाहिए !

टोंक कृषि मंडी में किसानों की समस्याएं सुनने पहुंचे रामपाल जाट ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जब शासन राजनीतिक लाभ के लिए भेदभाव करने लगता है तो स्थिति और भी गंभीर हो जाती है उन्होंने इसे ‘करेला और नीम चढ़ा’ जैसी स्थिति बताते हुए कहा कि यह समाज में शांति और सौहार्द के विपरीत है !
उन्होंने नगर परिषद और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए और कहा कि सफाई व्यवस्था पिछले पखवाड़े से ठप होने के कारण शहरवासियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है इसके अलावा बिजली विभाग की कार्रवाई पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि बिना पर्याप्त अवसर दिए कनेक्शन काटना जनता को अंधेरे में धकेलने जैसा है !
रामपाल जाट ने आरोप लगाया कि पथराव की घटना के बाद कई लोगों को प्रताड़ित किया गया और कुछ को अवैध रूप से हिरासत में भी रखा गया, जो निंदनीय है उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के 79 वर्षों बाद भी ऐसी स्थिति उत्पन्न होना लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है उन्होंने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग लोकतंत्र की हत्या के समान है इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उन्होंने राजस्थान के मुख्यमंत्री को पत्र भेजने की जानकारी दी !











































