राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट की सियासी जंग खत्म होने का नाम नहीं ले रही है कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान समय-समय पर फिर उभर आती है रविवार को गहलोत का दिया बयान इसी सियासी ड्रामे का नतीजा है गहलोत ने चर्चित घटनाक्रम का जिक्र किया जब उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष बनाने के लिए दिल्ली भेजने और राजस्थान की कमान सचिन पायलट को सौंपने की चर्चा जोरों पर थी उसी दौरान करीब 100 कांग्रेस विधायकों के बगावती तेवर सामने आए थे गहलोत ने दावा किया कि वह टकराव पार्टी हाईकमान के खिलाफ नहीं था बल्कि उस व्यक्ति के खिलाफ था जिसे उनकी जगह मुख्यमंत्री बनाने की तैयारी चल रही थी यानी सचिन पायलट !
गहलोत ने कहा कि 25 सितंबर की घटना उस व्यक्ति के खिलाफ थी जिसका नाम अगले मुख्यमंत्री के तौर पर चल रहा था- पायलट साहब ऐसी स्थिति बनी कि 100 विधायक एकजुट हो गए और उन्होंने कहा कि हममें से किसी को भी मुख्यमंत्री बना दो लेकिन उस व्यक्ति को नहीं जिसने मानेसर जाकर हमारी सरकार गिराने की कोशिश की थी हमने पार्टी का साथ दिया सरकार बचाई लेकिन जिसे सरकार गिराने की कोशिश का चेहरा माना गया उसे मुख्यमंत्री स्वीकार नहीं कर सकते थे बाद में इसे हाईकमान के खिलाफ बगावत बताकर पेश किया गया !
अगर मैंने हाईकमान के खिलाफ बगावत की होती तो क्या मैं मुख्यमंत्री बना रहता?सचिन पायलट को भी यह बात समझनी चाहिए हम उनके दुश्मन नहीं हैं बचपन से ही हमारे मन में उनके लिए स्नेह रहा है चाहे सचिन हों या मेरा बेटा वैभव जब हम सांसद थे तब ये दोनों 2-3 साल के बच्चे थे मैं आज भी उन्हें उसी नजर से देखता हूं लेकिन अब राजनीति में उन्हें कौन सलाह देता है यह मुझे नहीं पता !
गहलोत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पिछले सप्ताह पुष्कर में कांग्रेस का चिंतन शिविर आयोजित हुआ था राजस्थान और दिल्ली के जिला अध्यक्षों के लिए आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर के अंतिम दिन 1 जून को राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया लेकिन पूरे शिविर की चर्चा गहलोत की गैरमौजूदगी को लेकर रही सूत्रों के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री ने हेलिपैड पर राहुल गांधी से मुलाकात की और फिर खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए जयपुर लौट गए इसके चलते वह पुष्कर में मुख्य कार्यक्रम के इतर हुई एक अहम बैठक में शामिल नहीं हो सके जिसमें कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे हालांकि गहलोत खेमे ने इन अटकलों को खारिज किया है गहलोत समर्थकों का कहना है कि पुष्कर शिविर में राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष और विधानसभा में पार्टी के नेता के अलावा कोई बड़ा वरिष्ठ नेता मौजूद ही नहीं था उनके अनुसार, किसी भी तरह की महत्वपूर्ण बैठक नहीं हुई थी केवल NSUI, यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं और जिला अध्यक्षों के साथ एक अनौपचारिक बातचीत हुई थी !
गहलोत गुट का यह भी दावा है कि किशनगढ़ एयरपोर्ट पर राहुल गांधी से बातचीत के दौरान गहलोत ने स्वास्थ्य खराब होने की कोई बात नहीं कही थी लेकिन इन सफाइयों के बावजूद पुष्कर में गहलोत की अनुपस्थिति ने राजस्थान की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस आगामी चुनावों को देखते हुए राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन पर विचार कर सकती है !
सूत्रों का कहना है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद सचिन पायलट को फिर से राजस्थान की राजनीति के केंद्र में लाया जा सकता है और उन्हें संगठन की कमान सौंपी जा सकती है राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गहलोत की हालिया टिप्पणियां इसी संभावना के बीच आई हैं और उनका मकसद पुराने घावों को फिर से कुरेदना है जिससे पार्टी को 2020 की बगावत याद दिलाई जा सके 2020 में सचिन पायलट की बगावत के बाद जिस तरह गहलोत ने “भूल जाओ और माफ कर दो” की लाइन ली थी उसे दोहराते हुए उन्होंने कहा कि मैंने कहा था भूलो और माफ करो हर इंसान से गलती हो सकती है उनसे गलती हुई और उन्हें इसे स्वीकार करना चाहिए अगर उस समय उन्होंने मेरी भावनाओं को समझा होता तो वे भी मेरी सलाह मानते- भूलो और माफ करो !











































