राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर गर्मा गई है पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार सुबह प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया है कि राजस्थान में संवैधानिक संकट गहराता जा रहा है गहलोत का यह गुस्सा पंचायतों और नगरीय निकायों में पिछले एक साल से चुनाव नहीं कराए जाने और वहां प्रशासकों की नियुक्ति को लेकर फूटा है !

गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी बात रखते हुए संवैधानिक बारीकियों को सामने रखा उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 243E और 243U के तहत पंचायतों और निकायों का चुनाव 5 साल में कराना अनिवार्य है वहीं अनुच्छेद 243K चुनाव आयोग को स्वतंत्र रूप से चुनाव कराने की जिम्मेदारी देता है गहलोत के अनुसार, चुनाव टालना सरकार की इच्छा का विषय नहीं बल्कि संवैधानिक दायित्व का उल्लंघन है !
उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि परिसीमन, पुनर्गठन और वन स्टेट, वन इलेक्शन जैसे तर्क सिर्फ चुनाव टालने के बहाने हैं उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि अदालत पहले ही साफ कर चुकी है कि इन कारणों से चुनाव नहीं टाले जा सकते !

गहलोत ने याद दिलाया कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 439 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए चुनाव के लिए 15 अप्रैल 2026 की अंतिम समयसीमा तय की है सुप्रीम कोर्ट ने भी इस आदेश को बरकरार रखा है इसके बावजूद सरकार की गंभीरता पर सवाल उठाते हुए गहलोत ने कहा कि नागरिकों के मताधिकार को एक साल से रोकना दुर्भाग्यपूर्ण है !
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि 73वें और 74वें संविधान संशोधन के जरिए जनता को जो स्थानीय स्वशासन का अधिकार मिला था, उसे कुचला जा रहा है उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि लोकतंत्र केवल सत्ता चलाने का माध्यम नहीं है बल्कि संविधान के प्रति जवाबदेही भी है और राजस्थान की जनता अपने अधिकारों का हनन बर्दाश्त नहीं करेगी !











































